विस्तार
खंडेला से सम्पूर्ण भारत तक
उस यज्ञ में सम्मिलित एवं उसका संचालन करने वाले तेजस्वी ऋषिगण आगे चलकर वर्तमान राजस्थान के सीकर जिले में स्थित ऐतिहासिक नगर खंडेला तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बस गए और "खाण्डल विप्र" अर्थात "खंडेला के विप्र" कहलाए। इसका उल्लेख स्कंदपुराण के रेवाखंड में भी प्राप्त होता है।
शताब्दियों के क्रम में हमारे पूर्वजों ने वैदिक ज्ञान, धर्मनिष्ठ आचरण, विद्या एवं सेवा की उत्कृष्ट परंपरा को खंडेला से देश के कोने-कोने तक पहुँचाया। आज खाण्डल विप्र समाज साढ़े बहत्तर गोत्रों में संगठित है, प्रत्येक गोत्र की अपनी कुलदेवी है, और हमारे परिवार राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक सहित सम्पूर्ण भारत एवं विश्व के अनेक देशों में निवास कर रहे हैं।