हमारे बारे में

खाण्डल विप्र महासभा: सेवा, शिक्षा, और संस्कृति का समर्पण

अखिल भारतीय खाण्डल विप्र महासभा, खाण्डल विप्र (खण्डेलवाल ब्राह्मण) जाति का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन है। यह महासभा समस्त भारतवर्ष एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवास कर रहे समस्त खाण्डल समाज को संगठित, सुरक्षित, समृद्ध एवं शिक्षित करने के उद्देश्य से कार्यरत है।

मुख्य उद्देश्य

समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध

अखिल भारतीय खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना का उद्देश्य पारस्परिक सहयोग द्वारा समस्त भारत में फैली खाण्डल विप्र (खण्डेलवाल ब्राह्मण) जाति की सर्वांगीण उन्नति तथा समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करते हुए समाज के लोगों के जीवन को और अधिक समृद्ध बनाना एवं शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है।

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    समस्त समाज को संगठित करते हुए सामाजिक संगठन को सशक्त बनाना।

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    समाज की सर्वांगीण (विशेषतः धार्मिक, नैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक) उन्नति एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना पर बल देना।

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    समाज एवं राष्ट्र में शिक्षा की उन्नति के लिए विद्यालय, महाविद्यालय एवं तकनीकी परामर्श/प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना एवं संचालन करना।

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    समाज की युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तकनीकी एवं व्यावसायिक (रोजगारोन्मुख) शिक्षा एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।

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    समाज में महिलाओं की सर्वांगीण उन्नति हेतु स्त्री शिक्षा पर विशेष ध्यान देना एवं आवश्यकतानुसार उचित प्रबंध करना।

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    अनाथ, उत्पीड़ित, परित्यक्ता एवं विधवा महिलाओं, असहाय बालक-बालिकाओं तथा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु उपलब्ध साधनों के अनुसार उचित संरक्षण प्रदान करना।

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    सामाजिक उत्थान में महिलाओं एवं युवा वर्ग की भूमिका को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय महिला एवं युवा संगठनों का गठन करना।

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    बिना जाति एवं वर्ग भेदभाव के छात्र-छात्राओं हेतु छात्रावासों की स्थापना एवं संचालन करना।

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    आर्थिक रूप से कमजोर एवं योग्य छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहयोग एवं छात्रवृत्ति उपलब्ध कराना।

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    अकाल, भूकंप, बाढ़, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य आपात परिस्थितियों में पीड़ितों के लिए राहत कार्य एवं पुनर्वास में सहयोग करना।

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    जनहित में निःशुल्क चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करना।

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    सामाजिक कुरीतियों एवं बुराइयों के उन्मूलन हेतु समाज को जागरूक करते हुए सामूहिक उपनयन एवं विवाह संस्कार संपन्न करवाना तथा आपसी सौहार्द बढ़ाना।

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    अपने उद्देश्यों के प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी हेतु मुखपत्र एवं पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।

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    भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु संस्कृत एवं हिंदी भाषाओं के प्रचार-प्रसार के साथ सामाजिक एवं आध्यात्मिक साहित्य का प्रकाशन करना।

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    महासभा के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक कार्य करना, धन संग्रह करना तथा महासभा की संपत्ति एवं कोष का समुचित उपयोग एवं संरक्षण सुनिश्चित करना।

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    राज्य सरकार, केंद्र सरकार एवं अन्य संगठनों/विभागों से अनुदान प्राप्त करना।

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    ऋषियों एवं समाज हितार्थ भारतीय विषयों पर शोध कार्य करने वाले शोधकर्ताओं को सहयोग प्रदान करना।

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    भारतवर्ष के बाहर निवास कर रहे सामाजिक बंधुओं को राष्ट्र एवं समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करना।

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    पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण एवं जलापूर्ति जैसे राष्ट्रीय कार्यों में रचनात्मक सहयोग करना।

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    राष्ट्र एवं समाज के विकास में सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाना।

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    निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभिन्न उपक्रमों, न्यासों एवं संगठनों की स्थापना कर योजनाबद्ध कार्य संपादित करना।

महासभा का परिचय

हमारी महासभा

1908 स्थापना वर्ष
29 अध्यक्षों की परंपरा
100+ वर्षों की यात्रा
अखिल भारतीय उपस्थिति

खाण्डल विप्र महासभा, खाण्डल विप्र ब्राह्मण समाज की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था है। समाज के बुजुर्गों, संतों एवं विद्वानों के आशीर्वाद से स्थापित इस महासभा का मूल उद्देश्य प्रत्येक खाण्डल विप्र परिवार को एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक छत्र के नीचे एकजुट करना तथा हमारी पुरातन परंपराओं के शाश्वत मूल्यों का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार करना है।

एक पंजीकृत गैर-लाभकारी सामाजिक संगठन के रूप में महासभा, राज्य, जिला तथा स्थानीय सभाओं के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से कार्य करती है, जिसे समाज के समर्पित कार्यकर्ताओं, संरक्षकों एवं पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त है।

हमारा संकल्प

हमारा संकल्प है कि प्रत्येक खाण्डल विप्र परिवार को पहचान, बंधुत्व एवं प्रगति के एक सूत्र में पिरोया जाए। हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा, युवाओं के शैक्षिक एवं आर्थिक उत्थान, संकट के समय में सदस्यों की सहायता तथा हमारी ऋषि परंपरा की गरिमा को आगामी पीढ़ियों तक गौरवपूर्वक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

मुख्य गतिविधियाँ

महासभा समाज के सर्वांगीण उत्थान हेतु अनेक क्षेत्रों में सक्रिय है।

🤝

विवाह-परिचय सम्मेलन

एक व्यापक समाज निर्देशिका तथा परिचय सम्मेलन का संचालन, जिससे समाज में योग्य वैवाहिक संबंध स्थापित करने में सहायता मिलती है।

🎓

छात्रवृत्ति एवं प्रतिभा-सम्मान

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं प्रतिभा-सम्मान योजनाएँ तथा उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले योग्य बालक-बालिकाओं को आर्थिक सहायता।

🏛️

सम्मेलन एवं सांस्कृतिक उत्सव

क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक उत्सव, कुलदेवी दर्शन यात्राएँ तथा आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन कर समाज के पारस्परिक संबंधों को सुदृढ़ करना।

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चिकित्सा सहायता एवं कल्याण

कठिनाई में पड़े परिवारों को चिकित्सा सहायता एवं आपातकालीन राहत, तथा वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं एवं दिव्यांगजनों के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएँ।

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साहित्य प्रकाशन एवं डिजिटल उपस्थिति

खाण्डल विप्र समाज के इतिहास, गोत्रों, कुलदेवियों एवं परंपराओं पर साहित्य का प्रकाशन तथा डिजिटल उपस्थिति, ताकि विश्व में कहीं भी रहने वाले समाजबंधु अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

हमारे मूल्य

विद्या

ज्ञान एवं शिक्षा

विनय

विनम्रता एवं संयम

सेवा

समर्पण एवं परोपकार

संस्कार

सांस्कृतिक विरासत

विद्या, विनय, सेवा एवं संस्कार — ये चार स्तंभ महासभा की प्रत्येक गतिविधि के आधार हैं। हमारा दृढ़ विश्वास है कि कोई भी समाज तभी सशक्त रहता है जब उसकी परंपराओं का आदर हो, सदस्य परस्पर सहयोग में तत्पर हों और युवापीढ़ी आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी गहराई से जुड़ी हो।

हमसे जुड़िए

खाण्डल विप्र महासभा समाज के प्रत्येक सदस्य को — चाहे वह किसी भी गोत्र, क्षेत्र या पीढ़ी का हो — इस सामूहिक यात्रा का अंग बनने के लिए सादर आमंत्रित करती है।

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महासभा संस्थापक एवं इतिहास

स्थापना की पृष्ठभूमि

विक्रम संवत् की बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, शेष भारत के समान ही राजस्थान में भी जातीय जीवन के पुनरुत्थान का कार्य प्रारंभ हुआ। परंपरागत विचारों एवं सामाजिक चेतना के जागरण के साथ समाज को संगठित एवं उन्नत बनाने की भावना प्रबल हुई।

अखिल भारतीय खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया, विक्रम संवत् 1965 (1908 ईस्वी) में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में हुई। महासभा के संस्थापक राजवैद्य पंडित श्री रामजीलालजी माठोलिया थे, जो कोटकपुरा, जिला सुवारी (रोहतक) से संबंधित थे।

उन्होंने सासनी (मेरलीगढ़) निवासी नेन्थला बंधु वैद्यराज श्री श्रीनिवासजी, श्री जगन्नाथजी, श्री आनंदबल्लभजी एवं श्री रामकुमारजी शास्त्री आदि महानुभावों को खाण्डल विप्र (खण्डेलवाल ब्राह्मण) जाति के समुत्थान की प्रेरणा प्रदान की।

इसके फलस्वरूप नेन्थला बंधुओं द्वारा अपने सुपुत्र द्वारका प्रसाद के शुभ विवाह अवसर पर अखिल भारतीय खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना के रूप में समस्त भारतवर्ष में फैली खाण्डल विप्र जाति के पुनर्जागरण का बीजारोपण हुआ। इस स्थापना में पंडित श्री दुर्गादत्तजी विद्यालंकार (वृंदावन) का भी विशेष योगदान रहा। स्थापना दिवस पर ही महासभा का प्रथम अधिवेशन श्री लक्ष्मणाचार्यजी शास्त्री की अध्यक्षता में मथुरा में संपन्न हुआ।

महासभा के माध्यम से खाण्डल विप्र समाज को अज्ञानता एवं कुरीतियों से बाहर निकालकर प्रगति की दिशा में अग्रसर किया गया। आज यह समाज एक विकसित ब्राह्मण समाज के रूप में आगे बढ़ रहा है तथा महासभा अपने गौरवशाली 100 वर्षों से अधिक के इतिहास की साक्षी है।

राजवैद्य पं. श्री रामजीलालजी माठोलिया

राजवैद्य पं. श्री रामजीलालजी माठोलिया

महासभा संस्थापक

परमपूजनीय, स्वर्गीय महामहोपदेशक राजवैद्य पंडित श्री रामजीलालजी माठोलिया हमारी खाण्डल विप्र जाति के एक प्रेरणादायी महापुरुष थे। उनका उदय बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ था। वे खाण्डल विप्र समाज की सर्वतोमुखी उन्नति के परम अभिलाषी थे।

उन्होंने ही सर्वप्रथम खाण्डल विप्र जाति को उसके ऐतिहासिक गौरव से परिचित कराने के उद्देश्य से शतपथ ब्राह्मण, महाभारत एवं पुराणों से सामग्री संकलित कर खाण्डल विप्र जाति की उत्पत्ति एवं वंशावली संबंधी पुस्तक प्रकाशित की थी।

पंजीकरण प्रमाण-पत्र
महासभा पंजीकरण प्रमाण-पत्र

अखिल भारतीय खाण्डल विप्र महासभा का आधिकारिक पंजीकरण प्रमाण-पत्र — 1908 ईस्वी, मथुरा।

मुख्यालय का इतिहास

श्री भारद्वाज आश्रम, पुष्कर

अखिल भारतीय श्री खाण्डल विप्र महासभा का वर्तमान मुख्यालय — जहाँ 1951 से समाज की सेवा निरंतर चल रही है।

श्री भारद्वाज आश्रम, पुष्कर — महासभा मुख्यालय

अखिल भारतीय श्री खाण्डल विप्र महासभा की स्थापना के बाद से इसका मुख्यालय समयानुसार परिवर्तित होता रहा है। वर्तमान में महासभा का मुख्यालय श्री भारद्वाज आश्रम, पुष्कर में स्थित है।

इस भवन के सभागृह में खाण्डल विप्र जाति के आदिपुरुष महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा सन 1956 में स्थापित किए जाने के पश्चात् इसका नाम "श्री भारद्वाज आश्रम" रखा गया।

1908 – 1916

सासनी, अलीगढ़

महासभा की स्थापना से तृतीय अधिवेशन (1916) तक प्रथम कार्यालय।

1916 – 1925

दिल्ली

तृतीय से नवम अधिवेशन (1925) तक दिल्ली में कार्यालय संचालित।

1925 – 1941

जयपुर, राजस्थान

विशेष अधिवेशन (1941) तक जयपुर में केंद्रीय कार्यालय।

1941 – 1943

रावलखेड़ा, मध्य प्रदेश

विशेष अधिवेशन के निर्णयानुसार जयपुर से रावलखेड़ा स्थानांतरण।

1943 – 1945

सुजानगढ़, राजस्थान

दशम अधिवेशन (1943) के निर्णयानुसार खंडवा से सुजानगढ़।

1945 – 1951

रतनगढ़, राजस्थान

बारहवें अधिवेशन (1945) के पश्चात् रतनगढ़ में कार्यालय।

23 नवम्बर 1951 – अब तक

श्री भारद्वाज आश्रम, पुष्कर वर्तमान

मार्गशीर्ष कृष्ण नवमी, विक्रम संवत् 2008 को परम पूज्य स्वामी वीराचार्यजी महाराज द्वारा यह धर्मशाला महासभा को भेंटस्वरूप प्रदान की गई। तब से आज तक यही मुख्यालय है।

महासभा के विभिन्न कार्यालय

प्रधान कार्यालय
श्री भारद्वाज आश्रम, पुष्कर
जिला अजमेर (राजस्थान) — 305022
स्थान — Google Map
🗺️

Google Map शीघ्र उपलब्ध होगा

महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

1956

सभागृह में महर्षि भारद्वाज की प्रतिमा स्थापित; भवन का नाम "श्री भारद्वाज आश्रम" रखा गया।

1968

पं. रामेश्वरलालजी बाबावाली द्वारा भवन का प्रथम जीर्णोद्धार; पं. रामेश्वरलालजी बदेरा ने ₹41,000 का योगदान दिया।

1999

श्री रामप्रसाद ओमप्रकाश भाटीवाला, मुंबई के सौजन्य से लक्ष्मी नारायण मंदिर की स्थापना।

भारद्वाज छात्रावास

प्रतिवर्ष 30–40 विद्यार्थियों को आवास, भोजन, जल एवं विद्युत सुविधाएँ निःशुल्क; स्थायी कोष भी स्थापित।

नवीन भवन

अध्यक्ष श्री मोहनलालजी बोचीवाल के नेतृत्व में 4000 वर्गफुट भूखंड क्रय (अनुमानित मूल्य ₹2.25 करोड़)। नवीन महासभा भवन निर्माण प्रस्तावित।

महासभा अध्यक्ष

नेतृत्व की परंपरा

अखिल भारतीय श्री खाण्डल विप्र महासभा के अध्यक्षों ने समय-समय पर समाज को संगठन, शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक उत्थान की दिशा में नेतृत्व प्रदान किया है। वर्तमान में महासभा का नेतृत्व आदरणीय पंडित श्री मोहनलालजी बोचीवाल कर रहे हैं।

पं. मोहनलालजी बोचीवाल — वर्तमान अध्यक्ष
वर्तमान अध्यक्ष

पं. मोहनलालजी बोचीवाल

पिलानी, राजस्थान

कार्यकाल: 2022 – वर्तमान

अध्यक्ष परिचय: यहाँ वर्तमान अध्यक्ष का परिचय/संदेश प्रदर्शित होगा — कंटेंट बाद में प्राप्त किया जाएगा।

महासभा के पूर्व एवं वर्तमान अध्यक्षों की सूची

क्र.सं. अध्यक्ष का नाम अधिवेशन स्थल वर्ष
1 पं. लक्ष्मणाचार्यजी शास्त्री मथुरा 1908
2 पं. छीतरमलजी बोहरा, औरंगाबाद वृंदावन 1909
3 पं. चिरंजीलालजी, रेवाड़ी दिल्ली 1916
4 पं. शिवलालजी जोशी, रतनगढ़ भिवानी 1917
5 पं. देवीलालजी झुंझुनोदिया, मूंडवा हिसार 1918
6 स्वामी बालमुकुंदाचार्यजी, डीडवाना रतनगढ़ 1919
7 स्वामी बालमुकुंदाचार्यजी, डीडवाना फतेहपुर 1922
8 पं. बच्छावरलालजी माठोलिया, फिरोजपुर खंडवा 1923
9 पं. सोमदेवजी माठोलिया, मथुरा वाशिम 1925
10 पं. नन्दकिशोरजी माठोलिया, जयपुर सुजानगढ़ 1943
11 पं. शठकोपाचार्यजी काछवाल, डीडवाना नवलगढ़ 1945
12 पं. केदारमलजी गोवला, गुवाहाटी पुष्कर 1948
13 पं. नन्दकिशोरजी माठोलिया, जयपुर टोडाभीम 1952
14 पं. मांगीलालजी काछवाल, आकोला लातूर 1955
15 पं. बद्रीनारायणजी निढाणिया, सोलापुर धुलिया 1958
16 पं. गोपीलालजी रणवा, पुणे जयपुर 1960
17 पं. खेतूमलजी, नेन्थला ढाबावाली 1965
18 पं. बंशीधरजी माठोलिया, बीकानेर पुष्कर 1970
19 पं. नन्दकिशोरजी चौधरी, जयपुर किशनगढ़ 1977
20 पं. हीरालालजी सेवदा, बीकानेर जोधपुर 1982
21 पं. रामनिवासजी बणसिया, जयपुर दीमापुर 1989
22 पं. रामनिवासजी बणसिया, जयपुर फतेहपुर 1995
23 पं. रामलालजी गोरसिया, जयपुर जयपुर 2002
24 पं. रामलालजी गोरसिया, जयपुर गुवाहाटी 2006
25 पं. प्रहलाद रायजी डीडवानिया, जोधपुर मंचेरियल 2010
26 पं. संजय कुमारजी चौधरी, चेन्नई कोटा 2013
27 पं. मुरारीलालजी गोरसिया, जयपुर पुष्कर 2018
28 पं. रामेश्वरलालजी चौधरी, जयपुर पुष्कर 2022
29 पं. मोहनलालजी बोचीवाल, पिलानी पुष्कर वर्तमान
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