शिक्षा का विस्तार
समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार करना और सभी के लिए ज्ञान सुलभ बनाना।
विक्रम संवत 1965 (1908 ईस्वी) में मथुरा में महासभा की स्थापना की गई थी। राजवैद्य पं. श्री रामजीलाल जी माटोलिया की प्रेरणा से और पं. द्वारिका प्रसाद जी के विवाह के अवसर पर यह महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न हुआ।
तब से लेकर आज तक, महासभा खाण्डल विप्र समाज को शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास के माध्यम से आगे बढ़ाता आ रहा है।
राजवैद्य पं. श्री रामजीलाल जी माटोलिया (कोटकपुरा निवासी) की प्रेरणा और सहयोग से, सासनी (अलीगढ़) निवासी रूथला बंधुओं तथा अन्य विद्वानों के सहयोग से वैद्यराज पं. द्वारिका प्रसाद जी के विवाह के अवसर पर, वैशाख कृष्ण द्वितीया विक्रम संवत 1965 (1908 ई.) को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस महासभा की स्थापना की गई।
इस स्थापना में पं. श्री दुर्गादत्त जी विद्यारत्न (वृन्दावन) का भी विशेष योगदान रहा।
शिक्षा, एकता और कल्याण — इन तीन स्तंभों पर हमारा सम्पूर्ण कार्य आधारित है।
समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार करना और सभी के लिए ज्ञान सुलभ बनाना।
विभिन्न क्षेत्रों में महासभा की शाखाएं स्थापित करना और सामुदायिक नेटवर्क बनाना।
अधिक आबादी वाले शहरों में विद्यालय और छात्रावास खोलना।
विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देना।
शिक्षण फंड ट्रस्ट और जनकल्याण ट्रस्ट की स्थापना करना।
समाज के विकास और कल्याण के लिए निरंतर कार्य करना।
महासभा के साथ जुड़कर समाज के विकास में अपना योगदान दें।