हमारे बारे में

खाण्डल विप्र महासभा: सेवा, शिक्षा, और संस्कृति का समर्पण

हमारी संस्था परिवारों को एक मंच पर जोड़ती है, जहां सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और युवाओं का सशक्तिकरण मिलकर आगे बढ़ते हैं।

हमारी यात्रा

1908 से अब तक: 115+ वर्षीय विरासत

विक्रम संवत 1965 (1908 ईस्वी) में मथुरा में महासभा की स्थापना की गई थी। राजवैद्य पं. श्री रामजीलाल जी माटोलिया की प्रेरणा से और पं. द्वारिका प्रसाद जी के विवाह के अवसर पर यह महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न हुआ।

तब से लेकर आज तक, महासभा खाण्डल विप्र समाज को शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास के माध्यम से आगे बढ़ाता आ रहा है।

संस्थापकों का विजन

1908 से शुरू किया गया ऐतिहासिक योगदान

राजवैद्य पं. श्री रामजीलाल जी माटोलिया (कोटकपुरा निवासी) की प्रेरणा और सहयोग से, सासनी (अलीगढ़) निवासी रूथला बंधुओं तथा अन्य विद्वानों के सहयोग से वैद्यराज पं. द्वारिका प्रसाद जी के विवाह के अवसर पर, वैशाख कृष्ण द्वितीया विक्रम संवत 1965 (1908 ई.) को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में इस महासभा की स्थापना की गई।

इस स्थापना में पं. श्री दुर्गादत्त जी विद्यारत्न (वृन्दावन) का भी विशेष योगदान रहा।

मुख्य उद्देश्य

समाज के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध

शिक्षा, एकता और कल्याण — इन तीन स्तंभों पर हमारा सम्पूर्ण कार्य आधारित है।

📚

शिक्षा का विस्तार

समाज में शिक्षा का व्यापक प्रसार करना और सभी के लिए ज्ञान सुलभ बनाना।

🌿

शाखाओं की स्थापना

विभिन्न क्षेत्रों में महासभा की शाखाएं स्थापित करना और सामुदायिक नेटवर्क बनाना।

🏫

शिक्षण संस्थाएं

अधिक आबादी वाले शहरों में विद्यालय और छात्रावास खोलना।

🎓

छात्रवृत्ति योजना

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देना।

💼

ट्रस्ट की स्थापना

शिक्षण फंड ट्रस्ट और जनकल्याण ट्रस्ट की स्थापना करना।

🤲

समाज कल्याण

समाज के विकास और कल्याण के लिए निरंतर कार्य करना।

इस मिशन का हिस्सा बनें

महासभा के साथ जुड़कर समाज के विकास में अपना योगदान दें।

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